महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं पुलिस थाना आये बिना उनकी शिकायतों का शीघ्र निराकरण कराये जाने के उद्देश्य से दिनांक 01 जनवरी, 2022 को माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अभिव्यक्ति ऐप लांच किया गया है। इस ऐप की मुख्यतः दो विशेषताएं हैः-
01. एसओएस प्रणालीः कोई भी महिला जिन्होने अपने मोबाईल फोन पर यह ऐप डाउनलोड किया है और वह अपने आप को किसी स्थान पर असुरक्षित महसूस कर रही होती है, तो उनके द्वारा ऐप के एसओएस पैनिक बटन दबाते ही कुछ ही मिनटों में उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाती है, यह प्रणाली डॉयल-112 से इंटिग्रेटेड है।
02. शिकायत प्रणालीः ऐप के उपयोग से कोई भी पीड़ित महिला अपनी शिकायत काफी सरल तरीके से पुलिस तक पहुंचा सकती है। इसके लिए मोबाईल फोन पर शिकायत टाईप कर अथवा आवेदन पत्र के साथ शिकायत से संबंधित कोई फोटो/वीडियो अपलोड कर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऐप पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का प्राथमिकता के तौर पर निराकरण किया जाता है एवं पुलिस द्वारा उस पर की गई कार्यवाही की जानकारी भी आवेदिका इस ऐप के माध्यम से प्राप्त कर सकती है।
अभिव्यक्ति ऐप में अंतर्निहित एसओएस पैनिक बटन महिलाओं की सुरक्षा के लिए काफी उपयोगी है। ऐप के इस बटन को दबाते ही 10 सेकण्ड का ऑडियो/ वीडियो क्लिप ऐप पर आटोमैटिक रिकार्ड होकर पुलिस के पास चला जाता है, जिससे पुलिस को महिला का संकट में फंसी होने की जानकारी मिल जाती है और उन्हें तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। यह प्रणाली डॉयल 112 से इंटिग्रेटेड है। साथ ही एक एलर्ट मैसेज आवेदिका के लोकेशन के साथ आवेदिका के रिश्तेदार (ऐप पर रजिस्टर करते समय उपलब्ध कराये गये नंबर पर) को भी चला जाता है।
दहेज लेना/देना/मांगना/दहेज के लिए दुष्प्रेरित करना कानूनी अपराध है।
क्या करना है: दहेज लेन-देन की जानकारी होने पर तत्काल नजदीक के पुलिस थाना या महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें।
ऐप के उपयोग से कोई भी पीड़ित महिला पुलिस थाना जाये बिना अपनी शिकायत किसी भी स्थान से व समय पर पुलिस तक पहुंचा सकती है। इसके लिए मोबाईल फोन पर शिकायत टाईप कर अथवा आवेदन पत्र के साथ शिकायत से संबंधित कोई फोटो/वीडियो अपलोड कर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऐप पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निराकरण के लिए जिला स्तर पर एक राजपत्रित अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिनके द्वारा प्राप्त शिकायत को संबंधित थाना को भेजा जाता है और पुलिस थाने द्वारा 07 दिवस के भीतर शिकायत जांच कर प्रतिवेदन नोडल अधिकारी को भेजा जाता है, जिसे उनके द्वारा ऐप पर अपलोड किया जाता है और ऐप के माध्यम से ही आवेदिका शिकायत पर पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी प्राप्त कर सकती है।
यदि कोई पुरूष अपने परिवार या उनके साथ रहने वाली किसी महिला को शारीरिक, मौखिक, लैंगिक, भावनात्मक या आर्थिक रूप से दुर्व्यवहार करता है तो यह घरेलू हिंसा है।
क्या करना है: किसी महिला के साथ ऐसी घटना होती है तो वह तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी (घरेलू हिंसा) के पास आवेदन दे सकती है या पुलिस थाना को सूचित करें।
प्रसव पूर्व गर्भस्थ शिशु के लिंग की पहचान करना/कराना दण्डनीय अपराध है।
क्या करना है: महिला/पति/नातेदार द्वारा लिंग परीक्षण की जानकारी होने पर तत्काल नजदीक के पुलिस थाना को सूचित करें।
कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न के विरूद्ध संरक्षण और लैंगिक उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए यह कानून दिनांक 09.12.2013 से लागू किया गया है।
क्या करना है: पीड़ित महिला अपने कार्यालय/कार्य स्थल पर गठित आंतरिक शिकायत समिति या जिला स्तर पर गठित स्थानीय शिकायत समिति में शिकायत कर सकती है।
जो कोई, स्वयं या अन्य किसी व्यक्ति द्वारा टोनही के रूप में पहचान किये गये व्यक्ति को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है या नुकसान पहुंचाता है। सजा- वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकेगी तथा जुर्माने से भी दंडित किया जायेगा। क्या करना है- टोनही प्रताड़ना की जानकारी होने पर तत्काल नजदीक के पुलिस थाना को सूचित करें।
कोई व्यक्ति जो कोई वेश्यागृह चलाता है या उसका प्रबंध करता है अथवा उसको चलाने या उसके प्रबंध में काम करता है या सहायता करता है वह प्रथम दोषसिद्ध होने पर एक वर्ष से अन्यून और तीन वर्ष से अनधिक के लिए कठोर कारावास तथा दो हजार रूपए तक की जुर्माने से भी दंडित किया जावेगा और द्वितीय या पश्चातर्वी दोषसिद्धि की दशा में दो वर्ष से अन्यून और पांच वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कठोर कारावास तथा जुर्माने से भी, जो दो हजार रूपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।
अठारह वर्ष की आयु से अधिक का कोई व्यक्ति जो जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति की वेश्यावृत्ति के उपार्जन पर पूर्णतः या भागतः जीवन निर्वाह करेगा वह कारावास जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जावेगा तथा जुर्माने से भी, जो दो हजार रूपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और जहां ऐसे उपार्जन किसी बालक या अवयस्क की वेश्यावृत्ति से संबंधित है, वहां सात वर्ष से अन्यून और दस वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दण्डनीय होगा।
कोई भी व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है वह इस वर्ग के ऊपर अधिनियम के उपबंध (i) से (xv) तक में प्रावधानित अनुसार किसी प्रकार का अत्याचार करता है तो वह कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडित किया जावेगा।
इस अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं के अशिष्ट चित्रण को रोकना है। इसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:
इस अधिनियम का लक्ष्य महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना है।
महिलाओं को स्वास्थ्य हेतु कीमती ईलाज की नहीं बल्कि जानकारी, समय पर ईलाज और स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना ज्यादा आवश्यक है। जैसे:
निम्नलिखित सुरक्षा और गोपनीयता की सावधानियों का पालन करें:
बाल विवाह "शून्य" होता है। विवाह की उम्र लड़के की 21 वर्ष और लड़की की उम्र 18 वर्ष है।
सजा: बाल विवाह करवाने वाला, करने वाला, सहायता करने वाला या इसमें शामिल होने वाला व्यक्ति 2 वर्ष का कारावास अथवा एक लाख रूपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
क्या करना है: बाल विवाह की जानकारी होने पर तत्काल नजदीक के पुलिस थाना या महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें।
POCSO एक्ट 14 नवम्बर, 2012 से लागू किया गया है। लैंगिक दुर्व्यवहार एवं शोषण से संरक्षण अधिनियम में 18 वर्ष से कम उम्र के बालक/बालिकाओं से लैंगिक दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्ति के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
क्या करना है: लैंगिक दुर्व्यवहार की जानकारी होने पर तत्काल नजदीक के पुलिस थाना को सूचित करें।
महिलाओं को एकीकृत रूप से सहायता उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार की सहायता से प्रदेश के प्रत्येक जिले में वन स्टॉप सेंटर संचालन की स्वीकृति दी गई है। वन स्टॉप सेंटर में सभी वर्ग की महिलाओं (18 वर्ष से कम उम्र की बालिकाएं भी सम्मिलित हैं) को सलाह, सहायता, मार्गदर्शन एवं संरक्षण प्रदान किया जाता है।
पीड़ित महिलाओं/बालिकाओं को आवश्यकता अनुसार निम्न सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती हैं:
इस योजना के तहत ऐसे पीड़ित व्यक्ति या उसके आश्रितों को, जिन्हें किसी अपराध के कारण चोट या क्षति हुई है और जिन्हें पुनर्वास की आवश्यकता है, क्षतिपूर्ति के लिए निधि का प्रावधान किया गया है। इसमें अपराध की श्रेणी के अनुसार क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किये जाने का प्रावधान है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए पीड़ित व्यक्ति, उसके आश्रितों या किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है।